उत्तराखंड में सस्ती होने जा रही शराब

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कुलदीप रावत

उत्तराखंड आबकारी महकमे में अभी तक सरकार को 500 करोड़ तक का घाटा हो चुका है अब ऐसे में आबकारी आयुक्त सुशील कुमार विभाग को घाटे से उबारने के लिए प्रयासों में जुट गए हैं
सूत्रों की माने तो उत्तराखंड आबकारी महकमा आने वाले वित्तीय वर्ष में उत्तराखंड में राजस्व बढ़ोतरी को लेकर एक बड़ा बदलाव करने जा रही है शराब की कीमतों को लेकर उत्तराखंड आबकारी विभाग उत्तर प्रदेश से सस्ती शराब उत्तराखंड में करने जा रही है इस वक्त उत्तराखंड में उत्तर प्रदेश से अधिक कीमत पर सरकार शराब बेच रही है अधिक कीमत पर शराब बेचने को लेकर आबकारी महकमे ने यह आकलन किया कि बढ़ी कीमतों के कारण शराब तस्करी के मामले ज्यादा हो रहे हैं साथ ही उत्तराखंड आने वाले पर्यटक अपने साथ उत्तराखंड की सीमाओं हिमाचल या फिर उत्तर प्रदेश से ही शराब लेकर आ रहे हैं जिससे उत्तराखंड आबकारी महकमे को राजस्व हानि हो रही है अब ऐसे में आबकारी महकमा आने वाले नए वित्तीय वर्ष में उत्तराखंड में उत्तर प्रदेश से सस्ती शराब करने जा रही है

आबकारी में अभी तक 500 करोड़ का ‘घाटा’ .

आय के नये स्रोत तलाश रही राज्य सरकार अब पुराने स्रोतों से भी राजस्व वसूली का लक्ष्य पूरा नहीं कर पा रही है। वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर है लेकिन आबकारी विभाग राजस्व वसूली के अपने लक्ष्य से लगभग 500 करोड़ रूपये पीछे चल रही है। अधिकारियों के हाथ-पांव फूले हैं कि किस तरह शेष बचे डेढ़ माह में इस घोटे की पूर्ति की जाये। आबकारी आयुक्त ने इसी क्रम में 20 फरवरी को विभाग के अधिकारियों के साथ ही सभी जिलों के आबकारी अधिकारियों की बैठक देहरादून में बुलाई है।
पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने आबकारी विभाग से लगभग 3000 करोड़ रुपये का राजस्व वसूली का लक्ष्य रखा था जिसे सापेक्ष तकरीबन 2800 करोड़ रुपये की ही वसूली हो पाई। बावजूद इसके वित्तीय वर्ष 2018-2019 के लिये सरकार ने नया लक्ष्य 3180 करोड़ रुपये का रखा। चालू वित्तीय वर्ष 2019-2020 के लगभग साढ़े दस माह बीत चुके हैं। अब तक के जो आंकड़े हैं उनके मुताबिक राजस्व वसूली में लगभग 500 करोड़ की कमी देखी गई है, जिसका शेष बचे डेढ़ माह में भरपाई होनी नामुमकिन मानी जा रही है। दरअसल, प्रदेश में अंग्रेजी व देसी शराब के कुल 626 ठेके हैं। वित्तीय वर्ष 2019-2020 के लिये सरकार ने नई आबकारी नीति बनाते हुये पिछले वित्तीय वर्ष के ठेका संचालकों को 20 फीसदी अधिक राजस्व पर एक साल के लिये लाइसेंस बढ़ा दिया था। बावजूद इसके 626 में से 236 ठेके नहीं उठे। ये वो ठेके हैं जो घाटे में चल रहे थे। उसके बाद सरकार ने कैबिनेट में फैसला करते हुये बेस रेट में 35 फीसदी कटौती करते हुये इन ठेकों का लाइसेंस लेने का ऑफर शराब व्यासायियों को दिया, बावजूद इसके 131 ठेके आवंटित नहीं हो पाये। कहा जा रहा है कि इन 131 ठेकों के आवंटित न होने से सरकार को राजस्व वसूली में तगड़ा झटका लगा है। अब आगामी 20 तारीख को आबकारी कमिश्नर सुशील कुमार सभी जिले के जिला आबकारी अधिकारियों के साथ  आबकारी विभाग को घाटे से उबारने के लिए नई रणनीति बनाने जा रहे हैं अब देखना होगा आबकारी कमिश्नर कैसे इस वित्तीय वर्ष में अपने महकमे को घाटे से उबर पाने में कामयाब हो पाते हैं

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