ऊधमसिंहनगर जिले की कहां गई सड़क, कहां गए 75 करोड़।

करोड़ों रुपए की लागत से बनी सड़क आखिर कहां है यह देखने वाला कोई नहीं जीरो टोलरेंस की सरकार में कोई ढूंढने वाला है इस भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सड़क को।

विकास राय/ दिनेशपुर।

दिनेशपुर । 75 करोड़ से बनी दिनेशपुर – मटकोटा सड़क एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। वही करोड़ो रुपये से बनी सड़क एक साल भी नहीं चल सकी । सड़क को लेकर कई बार विभिन्न संस्था व राजनीतिक पार्टियां धरना प्रदर्शन कर चुकी हैं । इस दौरान लगातार सड़क की मांग कर रहे हैं , लेकिन उसके बावजूद प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है । वहीं सड़क निर्माण को लेकर जांच की मांग भी की गई , परन्तु उसका भी समाधान नहीं हुआ।

बता दें दिनेशपुर – मटकोटा मार्ग जिसको लेकर कई बार आंदोलन हुआ है । साथ ही कई राजनीतिक पार्टियों ने मार्ग को लेकर कई वायदे किए गए हैं । जिसके बाद भी धरातल पर कार्य होता हआ नजर नहीं आ रहा है । वहीं कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे और उनके बेटे भी कई बार लोगों को सड़क बनाने व जांच का आश्वासन दिए गए , लेकिन कई महीना बीत जाने के बाद भी आज लोग परेशान हैं । वही लोग आंदोलन करने को मजबूर हैं । इस दौरान सड़क की गुणवत्ता को लेकर आरटीआई में मांगी सूचना में बहुत सारी बात सामने आई थी । इस पर पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष रवि कुमार ने सड़क में हुए घोटाले की जांच की मांग की थी , लेकिन अभी तक कार्यदायी संस्था पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है । वहीं जब इस सड़क के बारे में कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे से बात की गई तो हर बार की तरह उनका एक ही जवाब रहा कि बहुत जल्द इस रोड को बनवा दिया जाएगा । आपको बता दें कि हफ्ते भर में इस रोड में गिर कर दो मौतें हो चुकी हैं और लगातार कई सालों से यह सिलसिला जारी है । साल भर में इस रोड में गिरकर 5 दर्जन से भी अधिक लोगों की मौत हो चुकी है । जिसके बाद भी प्रशासन इसकी सुधन नहीं ले रहा है । गौरतलब है कि 75 करोड़ की लागत से बनी क्षतिग्रस्त गदरपुर मटकोटा मार्ग का एक बार फिर बदहाल जर्जर हालत में पहुंच गई है । आईटीआई से हुए खुलासे में करोड़ की लागत से बने सड़क निर्माण में जमकर धांधली हुई है । वही राहगीरों में आक्रोश है । बता दें कि पूर्व में इस सड़क निर्माण को लेकर काफी आंदोलन हुए । इस दौरान आंदोलनकरियो पर मुकदमा भी हुए हैं। वही सभी राजनीतिक पार्टियां व सामाजिक संस्थाओं ने आंदोलनकारियों को समर्थन दिया था । इस दौरान इस सड़क निर्माण के लिए सबसे पहले सड़क निर्माण समिति और टेंपो व मैजिक यूनियन के नेतृत्व में लोगों ने आंदोलन किया । इसमें 52 दिनों तक ग्रामीण धरना प्रदर्शन और पांच दिन तक भूख हड़ताल की । जन आक्रोश को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दिनेशपुर आईटीआई परिसर पहुंच कर सड़क का शिलान्यास किया । 25 करोड़ का बजट पास किया । और सड़क बनकर तैयार हो गया। लेकिन सड़क की गुणबत्ता के साथ धांधली हुई है। वही पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष रवि कुमार ने बताया कि सूचना के अधिकार के तहत मामला ज्ञात हुआ कि सड़क 75 करोड़ की लागत से बनी है । वही आईटीआई से पता चला पानी की पाइप लाइन की सफाई , पुलिया का निर्माण जो दिखाया है । वास्तव में हुआ ही नहीं है । वह सड़क के बीचों बीच दबा दी गई है । जिसके वजह से सड़क टूटने लगी है । अगर सरकार एसआइटी से एनएच 74 की तरह सड़क की जांच कराए तो सड़क की गुणवत्ता के साथ की गई छेड़छाड़ सामने आ जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई संभव हो सके । इस दौरान सड़क निर्माण संघर्ष समिति ने कई बार धंधेबाजी का विरोध किया । आरोप लगाया कि लोनिवि और कार्यदायी संस्था सिडकुल की सांठ – गांठ के कारण मामला दबा दिया । वही सड़क का मामला फिर चर्चाओं में आ गया हैं। कही ऐसा न हो कि आगामी चुनाव में भाजपा को सड़क ही निगल जाए। जिसके चलते उनको चुनाव में गदरपुर बिधान सभा से हार का रास्ता देखना पड़े।

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