कपाट बंद होने पर भी रोज चढ़ाता है एक भक्त चढ़ावा भगवान बद्री विशाल को

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कुलदीप रावत

 

भक्त एक ऐसा शब्द जिसके कई अर्थ है जिस तरह भक्त बिना भगवान के अधूरा है उसी तरह भगवान भी बिना भक्तों के अधूरे हैं भक्त अपने भगवान को खुश करने के लिए तरह तरह से प्रयत्न करते हैं चढ़ावा चढ़ाते हैं व्रत यज्ञ कई कर्मकांड करते हैं लेकिन हम आपको आज भगवान बद्रीविशाल के ऐसे भक्तों के बारे में बताने जा रहे हैं जो भक्त निर्धन होते हुए भी कपाट बंद के दौरान भी अपने परमेश्वर को रोज चढ़ावा चढ़ाता हैं  पिछले 10 महीने में उसने एक दिन भी इस क्रम को टूटने नहीं दिया।
जी हां! बात अजब है पर सच है। भगवान बदरीविशाल का यह भक्त अनोखे तरीके से अपनी आस्था जताता है। दरअसल, बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर के रखरखाव और व्यवस्थाओं के संचालन की जिम्मेदारी श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के उठाती है। समिति का एक बैंक अकाउण्ट है जिसमें दानदाता कहीं से भी दान राशि जमा कर सकते हैं। हाल ही में राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि अब बीकेटीसी के बजाय दवेस्थानम् बोर्ड इस जिम्मेदारी का निर्वहन करेगी। सरकार के इस फैसले के तहत बीकेटीसी ने हाल ही में यह सोचकर कि आगामी यात्रा सीजन का संचालन देवस्थानम् बोर्ड करेगा, बदरीनाथ भगवान के पूजा एवं आरती की ऑनलाइन बुकिंग के लिये ड्राफ्ट के जरिये मिलने वाले रुपये भक्तों को वापस भेजने शुरू कर दिये। लगभग 62 हजार के ड्राफ्ट वापस लौटाये गये। समिति ने अपना बैंक अकाण्ट भी बंद करने की तैयारी शुरू कर दी। इसी बीच बैंक अकाउण्ट का स्टेटमेंट देखने पर सामने आया कि एक ऐसा भक्त है जो पिछले 10 माह से रोजाना इस अकाउण्ट में 108 रुपये जमा कर रहा है। एक भी दिन उसने यह क्रम टूटने नहीं दिया। अब तक वह बीकेटीसी के खाते में लगभग 32500 रुपये जमा कर चुका है। तहकीकात करने पर पता चला कि वह एक निर्धन व्यक्ति है जो रोज कमाई कर उससे 108 रुपये इस अकाउण्ट में जमा करता आ रहा है और आजीवन सामर्थ्य रहने तक उसने ऐसा करने का प्रण लिया है। चूंकि यह उसका गुप्त दान है लिहाजा समिति उसकी पहचान नहीं खोल रही है। यह किस्सा मुख्यमंत्री तक पहुंच चुका है। इसी बीच देवस्थानम् बोर्ड के गठन में हो रही देरी को देखते हुये फिलहाल बीकेटीसी ने बैंक खाता बंद न करने और अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते रहने का निर्णय लिया है।

 

 

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