Exclusive पहाड़ के लाल ने दिल्ली में लड़ी कानूनी जंग.. कमलेश भट्ट के लिए हाई कोर्ट में क्या हुई सुनवाई?

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पहाड़ के लाल ने दिल्ली में लड़ी कानूनी जंग
दिल्ली उच्च न्यायालय में ऋतुपर्ण उनियाल ने दायर की थी याचिका
 टिहरी  निवासी कमलेश भट्ट के पार्थिव शरीर को वापस दुबई भेजने का मामला
वकील उनियाल ने दायर की थी याचिकागढ़वाल के युवक कमलेश भट्ट की मौत अबू धाबी में हो गई थी। इसके बाद समाजसेवी रोशन रतूड़ी जो टिहरी के रहने वाले हैं और और दुबई में रहकर समाज सेवा का कार्य कर रहे हैं के प्रयास के चलते ही टिहरी गढ़वाल के युवक कमलेश भट्ट की बॉडी को दिल्ली भेजा गया था..

हाई कोर्ट में पिटीशन लगाने वाले टिहरी मूल निवासी एडवोकेट ऋतुपरन उनियाल

लेकिन दुखद बात यह है कि आपस में केंद्र सरकार की हेल्थ मिनिस्ट्री और इमीग्रेशन विभाग केक कन्फ्यूजन के चलते उक्त विमान कमलेश भट्ट की बॉडी दोबारा से आबू धाबी ले गया… यह तो थी अभी तक की कहानी जिसके बाद परिवार के लोग काफी निराश और परेशान हो गए इसी बीच पहाड़ का एक और लाल ऋतुपरन उनियाल जो दिल्ली में रह कर  दिल्ली हाई कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं उन्हीं फेसबुक के माध्यम से पता चला की टिहरी गढ़वाल कि युवक कमलेश भट्ट की दर्दनाक कहानी उन्होंने तुरंत फेसबुक के माध्यम से कमलेश भट्ट के परिवार को संपर्क साधा और उनकी एक पीटीशन हाईकोर्ट में लगा दी क्योंकि आजकल हाई कोर्ट में सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चल रही है और उनकी यह पेटीशन स्वीकार कर ली गई…

पेटीशन में उन्होंने केंद्र सरकार के हेल्थ डिपार्टमेंट, होम डिपार्टमेंट और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ इमीग्रेशन विभाग को पार्टी बनाया कल शनिवार के दिन माननीय हाईकोर्ट दिल्ली में इसकी सुनवाई हुई जिसमें सरकार की तरफ से एडीशनल मनिंदर आचार्य ने सरकार की तरफ से पक्ष रखा और इमीग्रेशन और हेल्थ डिपार्टमेंट के बीच कन्फ्यूजन की बात भी बताई जिसके बाद माननीय उच्च न्यायालय ने अपने अग्रिम आदेशों में कमलेश भट्ट की बॉडी लाने के लिए एंबेसी (भारत सरकार)आबू धाबी संपर्क साधने के लिए कहा गया है सूत्र बताते है कोविड-19 के संक्रमण के चलते हेल्थ डिपार्टमेंट और इमीग्रेशन विभाग में कंफ्यूजन की स्थिति थी इसकी वजह से कमलेश भट्ट की बॉडी लेने में देरी हो गई जबकि आबू धाबी एंबेसी भारत ने इस बात की पुष्टि की थी कि कमलेश भट्ट की मौत का कारण कोविड-19 नहीं बल्कि कार्डियो अटैक था बावजूद इसके हेल्थ मिनिस्ट्री और इमीग्रेशन विभाग अपने इसी कन्फ्यूजन में उलझा रहा जिसकी वजह से आज कमलेश भट्ट की बॉडी के साथ-साथ उनका परिवार काफी परेशान और दर-दर भटक रहा है इसी दौरान राज्य सरकार भी कमलेश भट्ट की बॉडी लाने के लिए लगातार प्रयास में जुट गया है.. लोकजन टुडे आपको हाई कोर्ट में प्रस्तुत पेटीशन और आबू धाबी के एंबेसी द्वारा जारी एनओसी प्रकाशित कर रहे हैं..

आबू धाबी एंबेसी (भारत सरकार)द्वारा जारी लेटर..

रोशन रतूड़ी ने इस बारे में अपने फेसबुक पेज पर जानकारी भी दी। आपको बता दें कि कमलेश भट्ट टिहरी गढ़वाल के सकलाना पट्टी के सेमवाल गांव के रहने वाले थे। वह अबू धाबी के एक कंपनी में काम करते थे और 16 अप्रैल को उनकी वह संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। रोशन रतूड़ी ने वादा किया था कि वह कमलेश भट्ट के पार्थिव शरीर को भारत पहुंचाएंगे और उन्होंने अपना वादा निभाया भी।

पिटीशन माननीय उच्च न्यायलय दिल्ली
उत्तराखंड सचिवालय द्वारा भेजा गया भारत सरकार को पत्र

 

 

 

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