क्या सिर्फ जुमला है जीरो टॉलरेंस उत्तराखंड में

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कुलदीप रावत

 




उत्तराखंड में क्या जीरो टॉलरेंस सिर्फ जुमला रह गया है या फिर मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के बावजूद भी मंत्री अधिकारी जीरो टॉलरेंस पर मुख्यमंत्री की आंखों में पट्टी बांधने का काम कर रहे हैं आयुष मंत्री हरक सिंह रावत के बयान से तो यही प्रतीत हो रहा है जिस अधिकारी को गड़बड़ी के आरोप में उसके पद से हटा दिया गया हो और जिस अधिकारी के खिलाफ जांच चल रही हो उसे फिर से निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद से नवाजा जा रहा है

 

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जीरो टॉलरेंस की बात तो करते हैं  और कई बार जीरो टॉलरेंस की चलते बड़ी कार्यवाही करते हैं वही उत्तराखंड आयुष विभाग मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस पर बट्टा लगाने का काम कर रहा है आयुष विभाग में निदेशक के पद पर रहे विवादित अधिकारी डॉ0 अरुण त्रिपाठी पर आयुष मंत्री हरक सिंह रावत की एक बार फिर मेहरबान नजर आ रही है। हमारे  पास पुख्ता जानकारी है कि अरुण त्रिपाठी को एक बार फिर निदेशक बनाने की तैयारी हो रही है। दरअसल अरुण त्रिपाठी को नियुक्तियों में लापरवाही करने,  चहेतों को एडजेस्ट करने व दवाओं की खरीद फ़िरोत में अनियमितता के आरोप में आयुष मंत्री हरक सिंह रावत ने जांच के आदेश देते हुए निदेशक पद से हटाकर विश्व विद्यालय में अटैच किया  था। अभी जांच शासन स्तर पर लंबित है लेकिन अब एक बार फिर विवादित अधिकारी को आयुष मंत्री निदेशक बनाने की तैयारी कर रहे है। हालांकि डॉ0 अरुण त्रिपाठी नियमानुसार निदेशक के पद पर काबिज भी नही हो सकते। हालांकि आयुष मंत्री हरक सिंह रावत निदेशक के पद पर काबिज होने वाले विवादित अधिकारी को अपने स्तर पर क्लीन चिट दे रहे है… उनके अनुसार अभी अरुण त्रिपाठी पर लगाये गए आरोप अभी जांच गतिमान है।लेकिन जांच के चलते उनकी नियुक्ति पर रोक नही लगाई जा सकती… हरक सिंह रावत के मुताबिक अरुण त्रिपाठी को स्थाई नियुक्ति नहीं दी जा रही है और अधिकारियों की कमी के चलते उन्हें इस पद पर बैठाना मजबूरी है।।


सवाल यह है कि जिस अधिकारी पर भ्रष्टाचार समेत तमाम दूसरे आरोप लगे हो, ऐसे अधिकारी को निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पद पर कैसे मिटाया जा सकता है।। और इस बात की क्या गारंटी है कि संबंधित अधिकारी इस पद पर बैठकर जांच को प्रभावित नहीं करेगा।। चौंकाने वाली बात यह है कि पहले विभाग के मंत्री ने खुद निदेशक पद से अरुण त्रिपाठी को हटाया लेकिन न जाने इन्होंने ऐसी कौन सी घुट्टी पिला दी अब मंत्री जी खुद ही इनकी पैरवी कर रहे हैं और चौंकाने वाली बात यह है मंत्री जी कह रहे हैं अधिकारियों की कमी होने के कारण उनको यह जिम्मेदारी दी जा रही है चलिए भैया वाह उत्तराखंड है यहां सब जायज है

 

 

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