प्रशासन की ओर से नही मिली रही ग्रामीणों को सुविधा।

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रिपोर्ट -:सुशील कुमार झा-

खानपुर क्षेत्र के नगला इमरती की आठ हजार की आबादी को पाबंद किए जाने को तीन दिन बीत चुके हैं।लेकिन ग्रामीणों को फल सब्जी पशुचारा व राशन का सामान उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जिसके चलते रोजेदार पानी से ही रोजा खोलने को मजबूर है।ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन अभी तक ग्रामीणों को जरूरी सामान की सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पाया है।जिसके चलते आवश्यक वस्तुओं में पशुचारे का संकट खड़ा हो गया है।गौरतलब है एम्स में भर्ती एक महिला की पुत्र वधू तीमारदारी के दौरान कोरोनावायरस से ग्रस्त थी। जिसके बाद जिलाधिकारी ने 29 अप्रैल की रात को नगला इमरती गांव को सील करने के आदेश दिए थे।जिसके फल स्वरुप पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने तीस अप्रैल की सुबह ही गांव को पूरी तरह सील कर दिया था।और आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी थी।जिसके चलते नगला इमरती की आठ हजार की आबादी घरों में कैद होकर रह गई है।हालांकि प्रशासन द्वारा मूलभूत सुविधाओं को उपलब्ध कराने का दावा किया गया था।लेकिन तीन दिन बीत जाने के बाद भी गांव में ना तो प्रशासन की ओर से फल व सब्जी उपलब्ध कराई गई है।और ना ही राशन तथा पशुचारा जिसके चलते लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।गांव की तमाम दुकानें पूरी तरह बंद है।रोजेदार पानी के सहारे रोजा खोलने को मजबूर हैं।
नगला इमरती निवासी जहांगीर आलम ने बताया कि गांव में आज तक कोई फल व सब्जी की रेहड़ी या वाहन नहीं आया है।जिसके चलते ग्रामीणों को घरों में रखे बचे राशन को खाने को मजबूर होना पड़ रहा है उन्होंने बताया आवश्यक सामान की सप्लाई ना होने से रोजेदारों को पानी से ही रोजा खोलना पड़ रहा है क्योंकि गांव में फल व खजूर आदि की बिक्री नहीं हो पा रही है और प्रशासन भी इस और कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
राजस्व लेखपाल सुभाष जेमिनी का कहना है कि प्रशासन ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत हैं गांव में परचून की कुछ दुकानों को चिन्हित किया गया है जल्द ही ऐसे दुकानदारों के नंबर जारी कर दिए जाएंगे ताकि ग्रामीणों को आसानी से जरूरी सामान उपलब्ध हो सके। उन्होंने बताया कि मंडी समिति सचिव से वार्ता हो चुकी है और जल्द ही गांव में फल व सब्जी की बिक्री शुरू कर दी जाएगी ।

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