बिग ब्रेकिंग! पुलिस ने प्रेमनगर लूटकांड के तीन बदमाशों को किया गिरफ्तार !

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लोकजन टुडे, देहरादूनः प्रेम नगर लूट कांड में पुलिस ने अब तक तीन बदमाशों को गिरफ्तार कर किया है। आरोपितों के पास से लूट के एक लाख 47 हजार रूपये बरामद किए जा चुके हैं। एसपी सिटी श्वेता चौबे का कहना है कि जिस समय पेट्रोल पंप मालिक के बेटे गगन भाटिया से लूट हुई थी उस समय बैग में करीब पौने तीन लाख रुपये थे। इसमें से आधी रकम बरामद कर ली गई है। शेष रकम बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस ने बदमाशों की पहचान कामेंद्र उर्फ बुल्ला, दीपिन कुमार, रोहन राठी तीनों बिजनोर के रहने वाले। तीनो का आपराधिक इतिहास 8 मुकदमे हैं दर्ज। एक अन्य आरोपी अजय अभी फरार है। 1 लाख 74 हज़ार ,एक पिस्टल 2 तमंचे तीन कारतूस,एक बाइक बरामद। कुल 3 लाख 15 हजार की हुई थी लूट। एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने किया खुलासा। दून के ही साईं विहार में रह रहे थे बदमाश।
दरअसल पुलिस ने इस लूटकांड में प्रयुक्त एक बाइक गत दिवस ही बरामद कर ली थी। पुलिस को यह बाइक नयागांव पेलियो के पास लावारिस खड़ी मिली। पुलिस ने बाइक को नयागांव पुलिस चौकी में दाखिल कर दिया था।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपितों को बिजनौर में छिपे बदमाशों को भी ट्रेस कर लिया था। बदमाशों के बिजनौर के कीरतपुर इलाके में छिपे होने की जानकारी मिलने के बाद देहरादून पुलिस की टीम बिजनौर में सर्च ऑपरेशन चला रही थी।

वहीं, पटेलनगर कोतवाली क्षेत्र के नयागांव पेलियो के पास से एक लावारिस बाइक मिली है। बताया जा रहा है कि लूटकांड की वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश प्रेमनगर क्षेत्र के ही एक गांव में छिपे थे। बदमाशों ने यहां कमरा भी किराये पर ले रखा था। ग्रामीणों ने शक होने पर पुलिस को खबर दी, लेकिन तब तक बदमाश बाइक छोड़कर फरार हो गए।

कहा तो यह भी जा रहा है कि पुलिस को वह बैग भी मिल गया था, जिसमें गगन कैश लेकर ठाकुरपुर रोड स्थित पेट्रोल पंप से घर लौट रहे थे। साथ ही एक मोबाइल भी मिला था, जिसके जरिए पुलिस बदमाशों की पहचान कर पाने में कामयाब हो सकी।

वसंत विहार व नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र में हुई लूट के भी तार प्रेमनगर लूटकांड से जोडऩे की कोशिश की जा रही है। पुलिस का मानना है कि वसंत विहार में रकम से भरे बैग की छीना झपटी के बाद एक बदमाश ने मैनेजर पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया था तो सरस्वती विहार में सराफा लूटकांड के दौरान भी बदमाशों ने पिस्टल लोड कर ली थी।

वहीं प्रेमनगर में बैग की छीनाझपटी के दौरान फायङ्क्षरग की गई। इससे एक बात तो साफ है कि तीनों लूटकांड के लुटेरे पेशेवर थे, अब देखना होगा कि प्रेमनगर लूटकांड के खुलासे के बाद क्या पुलिस पिछले लूटकांडों की कड़ी कैसे जोड़ती है।

ठाकुरपुर रोड पर चरणजीत सिंह भाटिया निवासी प्रेमनगर का केसरी फिलिंग स्टेशन के नाम से पेट्रोल पंप है। सोमवार की रात करीब सवा नौ बजे उनके बेटे गगन भाटिया दिन भर की बिक्री का कैश लेकर प्रेमनगर के विंग 6/5/3 स्थित अपने घर को निकले। दशहरा ग्राउंड के पास गली में मोड़ पर बाइक सवार दो बदमाशों ने उन्हें ओवरटेक कर रोक लिया।

गगन ने ब्रेक लगाया तो बाइक पर पीछे बैठे बदमाश ने गिरने का दिखावा किया। गगन कुछ समझ पाते, तब तक बदमाश कार के दरवाजे के पास आ गया और बैग छीनने लगा। तभी पीछे से आए बदमाश ने गगन पर फायर झोंक दिया। गोली उनके कंधे में लगी।

गोली लगते ही गगन ने बैग छोड़ दिया और बदमाश बाइक से प्रेमनगर बाजार होते हुए अंधेरे में ओझल हो गए। तब तक गोली चलने और गगन की चीख सुन आसपास के लोग एकत्रित हो गए और गगन को उन्हीं की कार से सिनर्जी अस्पताल में भर्ती कराया। गोली अभी भी गगन के कंधे में फंसी है।

पेट्रोल पंप मालिक के बेटे को गोली मारकर हुई करीब नौ लाख रुपये की लूट की सनसनीखेज वारदात में दून पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। वारदात की सूचना न तो वायरलेस सेट पर दी गई और न ही फोन से पुलिस कंट्रोल रूम को अवगत कराया गया। अधिकारियों का मानना है कि यदि पुलिस तत्काल सूचना को वायरलेस सेट के जरिए फ्लैश कर देती तो चंद मिनट में जिले से बाहर जाने वाले रास्तों पर नाकेबंदी कर चेकिंग शुरू कर दी जाती, लेकिन देर से सूचना फ्लैश होने से नाकेबंदी करने में करीब एक घंटे की देरी हुई।

देहरादून पुलिस के इस रवैये पर आइजी गढ़वाल अजय रौतेला ने नाराजगी जताते हुए एसएसपी से जवाब तलब किया है। मुखबिर तंत्र से पहले ही मुंह मोड़ चुकी देहरादून पुलिस को वारदात के खुलासे में कामयाबी तभी मिलती है, जब सीसीटीवी फुटेज से लेकर मोबाइल लोकेशन और सीडीआर की तिकड़ी फिट बैठ जाए।

बीती 14 फरवरी की रात वसंत विहार में शराब के ठेके के मैनेजर से हुई पांच लाख रुपये की लूट हो या फिर 15 अप्रैल को हुई नेहरू कॉलोनी के सरस्वती विहार में सर्राफा कारोबारी के यहां लाखों के आभूषणों की लूट की वारदात में फुटेज और सीडीआर के क्लू जहां तक पुलिस को ले गए।
पुलिस के कदम वहीं ठिठक कर रह गए। नतीजा शहर क्षेत्र में तीसरी बड़ी लूट के रूप में सामने है। वहीं, प्रेमनगर लूटकांड के मामले में तो घटना के समय से ही पुलिस का रवैया समझ से परे रहा। अधिकारियों का मानना है कि पुलिस में सूचनाओं के आदान—प्रदान करने का सबसे सुरक्षित माध्यम वायरलेस सेट है, लेकिन यहां तो वारदात के बाद पुलिस में ऐसी अफरा—तफरी दिखी कि वह वायरलेस सेट पर लूट की वारदात को फ्लैश करना तो दूर फोन से भी पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देना भूल गई।

लिहाजा पुलिस के तमाम बड़े अधिकारियों को वारदात की जानकारी काफी देर बाद तब मिली जब पेट्रोल पंप डीलर्स एसोसिएशन से जुड़े लोगों ने अफसरों को फोन कर बताया। आइजी गढ़वाल ने भी इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर समय पर सेट पर सूचना फ्लैश होती तो संभव था कि बदमाश कहीं न कहीं किसी चेकिंग प्वाइंट पर पुलिस के हत्थे चढ़ जाते। यही नहीं, सूचना पर बैरियर पर तैनात पुलिस कर्मी भी अलर्ट मोड में आ जाते।

फोन उठाना भी बंद कर देती है पुलिस सरकार ने पुलिस अधिकारियों को सीयूजी इसीलिए दिया है कि वह सूचनाओं को सहजता से लें और उसका जवाब भी दें। मगर यहां तो वारदात के बाद उल्टी ही गंगा बहने लगती है। सबसे पहले पुलिस फोन से दूरी बनाती है। इसके चलते तमाम अहम जानकारियां पुलिस के पास नहीं पहुंच पाती।

आइजी गढ़वाल अजय रौतेला के मुताबिक, प्रेमनगर लूट की कंट्रोल रूम और वायरलेस सेट के जरिए सूचना नहीं दी गई। यह अत्यंत गंभीर है। कंट्रोल रूम के रिकॉर्ड चेक करने के बाद एसएसपी से जवाब मांगा है। साथ ही निर्देशित किया गया है कि सभी छोटी—बड़ी घटनाओं की कंट्रोल रूम को जानकारी देनी होगी। इसमें लापरवाही अक्षम्य होगी।

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