रूड़की आईआईटी की वेंटीलेटर की बड़ी खोज!

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सलमान मलिक

देशभर में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जहां पूरे देश मे सम्पूर्ण लॉकडाउन किया गया है तो वही स्वास्थ्य सेवाओं को 24 सौ घण्टे सुचारू रखने के निर्देश दिए गए है। कोरोना की जंग से लडने के लिए पर्याप्त मात्रा में साधन ना होने के कारण शासन-प्रशासन द्वारा विभिन्न जगह व्यवस्थाएं की गई है। इसी के साथ देश की नामचीन संस्थान रुड़की आईआईटी भी सामने आई है। 

आईआईटी रुड़की ने एक कम लागत वाला पोर्टेबल वेंटिलेटर विकसित किया है जो कोविड-19 रोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में उपयोगी साबित होगा। ‘प्राण-वायु ’ नाम के इस क्लोज्ड लूप वेंटिलेटर को एम्स, ऋषिकेश के सहयोग से विकसित किया गया है, और यह अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। वेंटिलेटर मरीज को आवश्यक मात्रा में हवा पहुंचाने के लिए प्राइम मूवर के नियंत्रित ऑपरेशन पर आधारित है। स्वचालित प्रक्रिया दबाव और प्रवाह की दर को साँस लेने और छोड़ने के अनुरूप नियंत्रित करती है। इसके अलावा वेंटिलेटर में ऐसी व्यवस्था है जो टाइडल वॉल्यूम और प्रति मिनट सांस को नियंत्रित कर सकती है। वेंटिलेटर सांस नली के विस्तृत प्रकार के अवरोधों में उपयोगी होगा और सभी आयु वर्ग के रोगियों, विशेष रूप से बुजुर्गों के लिए खास लाभदायक है। प्रोटोटाइप का परीक्षण सामान्य और सांस के विशिष्ट रोगियों के साथ सफलतापूर्वक किया गया है। इसके अतिरिक्त इसे काम करने के लिए कंप्रेस्ड हवा की आवश्यकता नहीं पड़ती है| और यह विशेष रूप से ऐसे मामलों में उपयोगी हो सकती है जब अस्पताल के किसी वार्ड या खुले क्षेत्र को आईसीयू में परिवर्तित करने की आवश्यकता आ गयी हो। यह सुरक्षित और विश्वसनीय है क्योंकि यह रीयल-टाइम स्पायरोमेट्री और अलार्म से सुसज्जित है।

दरअसल शोध टीम में आईआईटी रुड़की के प्रो.अक्षय द्विवेदी और प्रो.अरुप कुमार दास के साथ एम्स ऋषिकेश से डॉ.देवेन्द्र त्रिपाठी ऑनलाइन सहयोग के साथ शामिल थे। उन्होंने कोविड-19 की इस संकटग्रस्त स्थिति में लोगों की मदद के लिए एक त्वरित प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए दूरसंचार के माध्यम से केवल एक सप्ताह पहले ही अपनी टीम बनाई थी। वेंटिलेटर पर अनुसंधान और विकास से जुड़े कार्य लॉकडाउन की अवधि के दौरान शुरू हुए| इसकी वजह से आईआईटी रुड़की के टिंकरिंग प्रयोगशाला की सुविधाओं का उपयोग करते हुए ही माइक्रोप्रोसेसर-कंट्रोल्ड नॉन-रिटर्न वाल्व, सोलेनॉइड वाल्व, वन-वे वाल्व आदि जैसे कई भागों के विकास की आवश्यकता थी।
“प्राण-वायु को विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह कम लागत वाली, सुरक्षित और विश्वसनीय मॉडल है, जिसका निर्माण तेजी से किया जा सकता है।

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