व्यंग चाचा की बात 16 आने सच होवें है…

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शाम की चाय पर चर्चा “चाचा बतोले” के साथ ये एक व्यंग है इसका किसी भी चरित्र से कोई मतलब आशय नहीं है ये लेखक की काल्पनिक सोच पर आधारित है… कृपया बुरा नहीं माने ये एक व्यंग मात्र है…

चाचा तेरी बात मे बल नज़र आता है आज तो ठेके खोले नहीं लेकिन कल परसो में आर्डर आ ही जाएंगे दारु से पहले चखने का इंतज़ाम तो कर दिया त्रिदेव बाबा ने… माल दोनों हाथों से पकड़ना जाने है कौन कहता है कि कैच छोड़ देवे.. यों तो हवा में उड़ कर कैच लपके है  तभी चाचा गंभीरता भरे स्वर में अबे  जानू हूँ अपने मुखिया को सारे कामो में से निकला हुआ है… कभी बीजगणित में बिना तैयारी के पेपर्स देकर fail हो जावे और सेटिंग करके पास हो जावे और कभी किसी में… अबकी सुनने में यों आ रहा है कि शराब का खेल कई दिनों में समझ पाया और अब ऐसा समझा कि किसी को समझने नहीं दे रहा… अरे चाचा… त्रिदेव बाबा मुखिया नहीं बल्कि मदारी है जैसे चाहवे वैसे नचावे.. अब देखलो मोदी बाबा कुछ केहवे और ये  कुछ और सुने वो केहवे दरवाजे बंद कर ले.. ये दरवाजे खोलने के पैसे कमा ले अजीब बात है कोरोना ने इसे करोडो कमवा दिए तभी चाचा कहता है अबे इसका यों ही धंधा है काम कोई आता नहीं बस यों ही सोचता रेहवे कि माल कौन दे सके अबकी तो किस्मत इसकी कोरोना से करोड़ों मिल गये..तभी..  अभी तो बेटा देखता जा 19 दिनों में क्या क्या करता है ऐसे ऐसे आर्डर बनवा देगा जो रिकॉर्ड बनेंगे सुना तो यों भी है college वालो को भी धमकाया है जिन्होंने पहले मोटे कमा लिए थे अब उनसे नंबर लगवा लिया है कि कोरोना के नाम पर मदद करो… चाचा मेरी समझ में यू नहीं आ रहा मोदी बाबा तो यू कह  रहा था कि कोरोना छूने से भी फ़ैल जावे गन्दगी से भी फ़ैल जावे तो अब होटल वाले कितनी बार हाथ दो रहे और कितनी बात छीख़ मार रहे…  और चाचा WHO ने तो ये बताया कि मॉस और अंडे से बचो लेकिन देव बाबा ने तो मांस अंडे की दुकान खोलवा दी यूं तो करोना करा कर ही मानेगा… अबे त्रिदेव बाबा तुझे क्यों नहीं समझ में आ रहा तू भी नहीं बचने का… यों कैसे पता चलेगा त्रिदेव बाबा यों तो जायदा हो लिया दिक्कत हो जा गी… गरीबो की कोस लग जावेगी मान जा बर्बाद हो जावेगा… 

So Sorry बुरा नहीं मानो ये तो व्यंग है

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