व्यंग: चाचा बतोला खोलेगा बाजार खुलने के पीछे का राज़!

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शाम की चाय पर चर्चा “चाचा बतोले” के साथ ये एक व्यंग है इसका किसी भी चरित्र से कोई मतलब आशय नहीं है ये लेखक की काल्पनिक सोच पर आधारित है… कृपया बुरा नहीं माने ये एक व्यंग मात्र है…

चाचा बतोला और उसका भतीजा प्रकाशा के बीच करोना वायरस की दहशत और सरकार का फरमान…
 चाचा बतोला शाम की चाय पर अपने भतीजे प्रकाशे का इंतजार कर रहा था… तभी चाचा के मोबाइल में एक व्हाट्सएप आया, चाचा ने मोबाइल खोला मैसेज पढ़ने लगा… मैसेज में लिखा था सरकार लेगी कोरोना वायरस को लेकर बड़ा निर्णय… चाचा पिछले 7 दिन से घर में ही कोरनटाइन  हुआ था मैसेज पढ़ते चाचा खुश हो गया और तुरंत बिना किसी देर किये अपने भतीजे प्रकाशे को जोर से आवाज लगाईं “अबे कहा मर गया प्रकाशे.. आज चाय भी मिलेगी या नहीं…तभी प्रकाशा चाय की केतली और गिलास ले लेकर दौड़ता हुआ नजर आया और कहने लगा रे चाचा जो चाय तुम्हारे खातेर ही बनाई थी आ लिया चाचा… 
 चाचा 7 दिन बाद घर से निकला था और उसके मोबाइल पर जो मैसेज आया था वह भी अपने भतीजे को बताना था क्योंकि और तो कोई चाचा के नजदीक भी नहीं आ रहा था..चाचा कोरोना सस्पेक्टेड जो था… प्रकाशा आते पूछता है अरे  चाचा आराम है कि भी नहीं, अंदर की हड्डी कड़ कड़ा भी रही कि नहीं.. तभी चाचा तपाक से बोलता है बे भूतनी के तू तो चाहवे ही है कि मैं मर जाऊं.. तभी चाचा बोलता है…चाय पिला जल्दी से… चाय की चुस्की लेते हुए अपने भतीजे को चाचा कहता है अरे सुन प्रकाश से आज तो सरकार की तरफ से एक मैसेज वायरल हो रहा है जिले के सबसे बड़े अधिकारी ने  बताया है कि सुबह 7:00 बजे से 1:00 बजे तक बाजार खुलेगा…. तभी प्रकाशा  बोलता है  वाह अरे वाह चाचा क्या खबर है अब तो 10:00 बजे के बाद बोतल की दुकान भी खुल जाएगी पूरे महीने की बोतल उठा कर लाऊंगा… चाचा प्रकाशे  की बात बड़े ध्यान से सुन रहा था तभी प्रकाशा का ध्यान चाचा की शक्ल पर गया चाचा की शक्ल बड़ी डरी सहमी सी थी तभी प्रकाशे ने चाचा से पूछा क्यों चाचा क्या बुरा कर दिया सरकार ने…. चाचा बड़ी गंभीरता से बोलता है पहले यों बता कि कोरोना वायरस खत्म हो लिया क्या?  अरे चाचा तुझे क्या बता दू  कोरोना वायरस तो बहुत तेजी से फैल रहा है यो ऐसे ही  खत्म नहीं हो जाएगा यह तो कइयों की जान लील जावेगा… प्रकाशे  एक  बात को बता…  तो क्या फिर मोदी जी का जो ऐलान था 21 दिन बंद करने का वह यूं ही था क्या! डरा रहे थे क्या मोदी जी… या फिर किसी ने मुखिया के साथ गेम कर दिया?  तभी प्रकाशा बोलता है क्या चाचा गेम?  चाचा कहता है हां बेटा गेम कर दिया किसी ने मुखिया के साथ… प्रकाशा  पूछता है किसने कर दिया गेम त्रिदेव बाबा के साथ… अच्छा तू ही बता प्रकाशे मोदी जी कह रहे हैं सोशल डिस्टेंसिंग करो और यों  आर्डर किसने  पास कर दिया की सुबह 7:00 से 1:00 बजे तक बाजार खुलेगा बेटा बाजार खुलेगा तो बंदर नहीं नाचने के बाजार में…जनता कूदेगी बाजार में अभी तक तो सुबहे बाजार खुलने से ही दिक्कत हो रही थी कहा तो मुखिया यूं कह रहा था के 3 घंटे बाजार खुलने के बाद भीड़ बहुत बढ़ जावे हैं टोटल कर्फ्यू लगाऊंगा… लेकिन यूं समझ में नहीं आ रहा है यह गेम किसने पलट दिया…. तभी चाचा की छठी इंद्री काम करने लगी चाचा को समझ आ गया… चाचा कूद पड़ा और कहने लगा.. ओ तेरे की यों बात है जो किसी की भी समझ में नहीं आयी  वो चाचा को आयी …. तभी प्रकाशा,   चाचा की ख़ुशी और उतावलापन देख  घबरा गया और कहने लगा अरे चाचा क्या मिल गया बम मिल गया क्या… तभी,  अबे यू पता चल गया कि किसने गेम किया है? प्रकाशे ने पूछा अरे चाचा  यों बता कौन है वह… तभी, अबे प्रकाशे वो कोई और नहीं बल्कि शराब के बड़े कारोबारी है जिन्होंने बड़े नोट जमा करा रखे है और कमीशन भी पूरा दे रखा है दुकान तो खोलने भी चाहिए यूं ही असली वजह भी है… अबे शराब के कारोबारियों ने करोड़ों रुपए का कमीशन का चढ़ावा चढ़ा रखा है हमारे गाँव के मुखिया की ऐसी तैसी कर रखी थी… और शराब की वजह से करोना वायरस भागे भी है और जितना लोग शराब पिएंगे उतना करोना भागेगा.. शराब की दुकान भी खुल गई शराब भी बिक गई कमीशन का उलहाना भी उतर गया और मुखिया को राजस्व की प्राप्ति भी होगी है ना बेटा एक तीर से कई निशाने देखा बेटा मुखिया की सोच कोरोनावायरस का खौफ दिखाकर नोट कमा गया… और बावली जनता को सूली पर चढ़ाने का कामकर गया 
जय हो मुखिया बाबा की… 
 “बुरा ना मानो कोरोना वायरस का डर है” सो सॉरी साहब

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