सावधान !! लॉकडाउन में ठगी का न हो जायें शिकार

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रिपोर्ट:- सुशील कुमार झा
जैसा की आजकल सब लॉकडाउन की वजह से घर पर ही है और अपना अधिकतर समय इंटरनेट के माध्यम से गुजार रहे है और करीब करीब हर को ई इस समय किसी न किसी रूप से इंटरनेट और सोशल साईट से जुड़ा हुआ हैI आज हर कार्य करीब करीब इंटरनेट के माध्यम से हो रहा है चाहे ऑफिस का वर्क हो या बैंक से लेंन दें और चाहे ऑफिस की मीटिंग इस दोर में कई लोनो ने इंटरनेट को पहली बार उपयोग किया हैI ऐसे में कई लोग इसका गलत उपयोग कर लोगो को ठगने का कार्य भी कर रहे हैI आज कल में अगर देखा जाय तो सोशल क्राइम में काफी बढ़ोतरी हुई हैI इसलिए सोशल क्राइम को समझना जरुरी है जिसके लिए भारतीय जागरूकता समिति के अध्यक्ष एम हाईकोर्ट नैनीताल के अधिवक्ता ललित मिगलानी से एक विशेष चर्चा कर साइबर क्राइम को क़ानूनी रुप से समझने की कोशिश की गई जो आज के समय में हर किसी को जानना जरुरी हैI मिगलानी ने बताया साइबर क्राइम एक प्रकार का क्राइम होता है, जो अक्सर कंप्यूटर, मोबाइल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के माध्यम से किया जाता है। इसमें कंप्यूटर के माध्यम सबसे ज्यादा उपयोग में लाया जाता जय जिससे कई प्रकार के अपराध कर लिए जाते हैं। यह अपराध कई प्रकार के होते हैं जैसे- स्पैम ईमेल, हैकिंग, वायरस डालना, किसी की व्यक्तिगत या ऑफिशियल जानकारी को प्राप्त करना, किसी के अकाउंट पर नजर रखना। यह सारे क्राइम के अंतर्गत आते हैं। साइबर क्राइम करने वाले अपना काम चालाकी से करते हैं और उनके बारे में कुछ पता भी नहीं चलता है। मिगलानी ने बताया कानून ऐसे मामलो में काफी सख्त है कानून में इस प्रकार के अपराधो को रोकने के लिए कड़े नियमो का उल्लेख है अगर कोई व्यक्ति हैकिंग करता है तो कानून में आईटी (संशोधन) एक्ट 2008 की धारा 43 (ए), धारा 66 – आईपीसी की धारा 379 और 406 के तहत कार्रवाई मुमकिन सजा: अपराध साबित होने पर तीन साल तक की जेल और/या पांच लाख रुपये तक जुर्माना।
कोई व्यक्ति डेटा चोरी करता है तो आईटी (संशोधन) कानून 2008 की धारा 43 (बी), धारा 66 (ई), 67 (सी) – आईपीसी की धारा 379, 405, 420 – कॉपीराइट कानून सजा: अपराध की गंभीरता के हिसाब से तीन साल तक की जेल और/या दो लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान हैI
कोई व्यक्ति वायरस स्पाईवेयर फैलता है तो आईटी (संशोधन) एक्ट 2008 की धारा 43 (सी), धारा 66 एम् आईपीसी की धारा 268 के अंतर्गत अपराधी होगी I
देश की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने के लिए फैलाए गए वायरसों पर साइबर
आतंकवाद से जुड़ी धारा 66 (एफ) भी लागू (गैर-जमानती)। सजा : साइबर-वॉर और साइबर आतंकवाद से जुड़े मामलों में उम्र कैद। दूसरे मामलों में तीन साल तक की जेल और/या जुर्माना।
मिगलानी ने समाज के हर वर्ग को यही सन्देश देना चाहता हूँ की अपराध तो अपराध होता है जब भी अपराध होता है, अपराधी कितना भी होशियार क्यों न हो फिर भी कोई न कोई सबूत छोड देता है और कानून के शिकंजे में फस ही जाता है जिससे अपना और अपनों का दोनों का भविष्य ख़राब होता हैI

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