स्पेशल रिपोर्ट: कोरोना वायरस ने पलायन कर चुके लोगों को चढ़ाया पहाड़!

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उत्तराखंड में एक बात तो बहुत अच्छी हुई आखिरकार करोना वायरस ने वह करके दिखा दिया जो अभी तक प्रदेश का कोई मुख्यमंत्री हो या मंत्री नहीं कर पाए हैं कोरोना वायरस के चलते अभी तक पहाड़ खाली थे लेकिन पहाड़ में अब वह सभी लोग वापस लौटने लगे है जो अब से कुछ सालों पहले पलायन कर चुके थे दिल्ली हो महाराष्ट्र हो गुजरात हो या देश का कोई भी कोना… कोरोना वायरस से अछूता नहीं है तभी तो ऐसे में हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि अपने-अपने घरों में ही रहे क्योंकि यह वायरस भीड़-भाड़ इलाकों में ज्यादा फैलता है.. तो इस बात को सुनकर पलायन कर चुके काफी सारे लोगों ने मन बनाया क्यों ना अपने पहाड़ में वापसी की जाए और हुआ भी ऐसे ही कल ऋषिकेश जो पहाड़ का प्रथम द्वार कहा जाता है वहां के हालात देखकर सभी के हाथ पांव फूल गए ऋषिकेश बस अड्डे पर सैकड़ों की तादाद में लोग पहाड़ में जाने के लिए बसों के इंतजार में खड़े रहे ऐसे हालात देखकर प्रशासन के हाथ पांव फूल गए कि यह आखिर भीड़ आई कहां से… सभी अचंभित है कोई दिल्ली से आया है कोई महाराष्ट्र तो कोई देश के अलग-अलग कोनों से आया…

इस भीड़ को देखकर ही इस बात का तो इल्म हो गया कि वह सभी लोग जो पलायन कर चुके थे अब उन्हें इस बात का अंदाज़ा हो गया है कि घर से जायदा सुरक्षित जगह कोई नहीं होती… इस एहसास को कराने के पीछे ना तो किसी मंत्री का हाथ है ना किसी नेता का हाथ इसके पीछे किसी का हाथ है तो वह है दहशत… देर से आए लेकिन समय पर आएं.. लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि यह लोग संक्रमण लेकर तो नहीं लौट रहे यह एक बड़ा सवाल और चुनौती है प्रशासन के लिए…. 

 

अपने घर से ज्यादा सुरक्षित स्थान उनके लिए कोई और नहीं है आप यह कोरोना की ही दहशत है नहीं तो शायद यह लोग कभी वापसी ना करते.. और शायद अब आप वापसी की है तो भविष्य सुरक्षित करने के लिए अब कुछ ना कुछ योजना भी बनाने के लिए मजबूर होंगे… यह तो थी बात पहाड़ से पलायन कर चुके उन लोगों की जो अब दोबारा से पहाड़ की तरफ कोरोना वायरस के द्वारा भेजे गए हैं या लौट रहे हैं लेकिन अहम सवाल अभी भी जस का तस है कि करोना को हराना है घर से बाहर नहीं निकलना है सुरक्षित रहिए जीवित रहिए… 

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