उत्तराखंड में दाखिल होने के बाद गायब हो गए 211 लोग, पुलिस के छूटे पसीने

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देहरादून: कोरोना संकट से जूझ रहे उत्तराखंड में प्रदेश सरकार नई चुनौतियों से जूझ रही है। सबसे बड़ी चुनौती हैं, वो लोग जन्हें ट्रेस करना मुश्किल होता जा रहा है। पहले उत्तराखंड में एंट्री के लिए प्रतिदिन दो हजार लोगों की लिमिट तय की गई थी।

अनलॉक-4 में इसे खत्म कर दिया गया। इसके खत्म होने के साथ ही राज्य सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं जहां राज्य में एंट्री मिलने के बाद लोगों ने अपना नंबर ही ऑफ कर दिया है।

अब ऐसे लोगों को ट्रेस करना पुलिस के लिए सिर दर्द बना हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो राज्य में दाखिल होने के बाद 211 लोगों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए, जिन्हें ट्रेस करने में परेशानी हो रही है।

उत्तराखंड में पिछले एक महीने में कोरोना वायरस के आंकड़ों ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कोरोना वायरस के मामलों के बढ़ने के पीछे का कारण है टेस्टिंग में बढ़ोतरी। उत्तराखंड में कोरोना वायरस के मामले 23 हजार से पार हो गए हैं। विशेषज्ञों की मानें तो यह आंकड़ा सिंतबर अंत तक 40 हजार पार हो सकता है। देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिले में प्रदेश की 66 प्रतिशत आबादी रहती है लेकिन प्रदेश में अब तक जिन्ही 4 जिलों को कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। इस तरह राज्य में कोरोना संक्रमण के बढ़ रहे खतरे के बीच प्रदेश सरकार के लिए पहले तय पाबंदी में ढील देने के बाद चुनौती बढ़ गई है। राज्य में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों में खास तौर पर चार जिलों देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर और नैनीताल में ऐसे लोगों की संख्या अधिक है, जो गंतव्य पर पहुंचने के बाद मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर दे रहे हैं।

राज्य के मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने कुछ दिन पूर्व जानकारी दी थी कि अभी तक 211 व्यक्ति ऐसे हैं, जिन्होंने राज्य में दाखिल होने के बाद अपने मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर दिए हैं। हालांकि इन्हें ट्रेस करने के लिए वैकल्पिक कदम उठाए जा रहे हैं। कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए उत्तराखंड में प्रवेश करने वालों पर नजर रखना जरूरी हो गया है। कोरोना संक्रमण के मामलों के बढ़ने के साथ कंटेनमेंट जोन में भी इजाफा हो रहा है। अन्य राज्यों से आने वालों के लिए पंजीकरण कराना बहुत जरूरी है। इस पर जोर देते हुए संबंधित जिलों के प्रशासन को इस बारे में हिदायत दी गई है। साथ ही कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए बेड, वेंटिलेटर और मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ को बढ़ाने की आवश्यकता में बढ़ोतरी की गई है।

इन परिस्थितियों में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए व्यापक जन जागरूकता की आवश्यकता है। बता दें कि केंद्रीय गृह सचिव के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने अन्य राज्यों से आने वाले व्यक्तियों की प्रतिदिन की संख्या सीमित करने का पुराना आदेश रद्द कर दिया है। केंद्र सरकार की अनलॉक-चार की गाइडलाइन के मुताबिक राज्य अब लॉकडाउन को लेकर खुद फैसला नहीं कर सकेंगे।

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