अब कब समझोगी मेरी सरकार.. पहली ही आगाह कर चुके है!

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पहले ही आगाह किया है.. अब समझें या ना समझें मेरी सरकार
अविकल थपलियाल,
वरिष्ठ पत्रकार

29 मार्च को देहरादून में होटलों से होम डिलीवरी का आदेश जारी किया गया था। मैंने इस पर कुछ लिख कर कोरोना के खतरे से आगाह कराया था। अब दिल्ली में एक पिज़्ज़ा डिलीवरी बॉय कोरोना संक्रमित पाया गया। जहां जहां pizza supply हुआ उन 72 घरों को भी quarantine कर दिया गया है। तो फिर उत्तराखंड की बहुमत की सरकार क्या सोच रही है। देखिये tv के स्क्रीन शॉटस

पहले ही आगाह किया है.. अब समझें या ना समझें मेरी सरकार

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29 मार्च की पोस्ट
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कोरोना संकट- दून में होटल से भोजन की होम डिलीवरी
..ये डिश हजम नहीं हुई मेरे सरकार
– सरकार जी, इससे संक्रमण बढ़ेगा या घटेगा
-संक्रमण के डर से नहीं खुले कई होटल
-आदेश वापस लेना जनहित में
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..जब कोरोना से बचने के लिए पूरा विश्व साफ-सफाई और social distancing को मुख्य अस्त्र बनाकर चल रहा हो। ऐसे में नाटकीय ढंग से और lockdown के बीच देहरादून जिले के restaurent व होटल खोलने के आदेश कर दिए गए वो भी इस ताकीद के साथ कि वे सिर्फ online order पर भोजन की होम डिलीवरी करेंगे। अपने होटल में बैठाकर ग्राहक को खाना नही खिलाएंगे।
जनाब ऐसी क्या आफत आ गयी थी। कोरोना आतंक के बीच जब व्यक्ति पानी भी अपने हाथ से ले रहा है। ऐसे में होटल का ताजा-बासी खाना लेकर आये होम डिलीवरी boy से infected होने का खतरा नहीं है सरकार। इस समय सभी अपने घर का फ्रेश बना खाना खाने में ही भलाई समझ रहे हैं। कोरोना के डर से किसी की जबान इतनी चटोरी भी नहीं है कि बाहर का खाना खाकर जिंदगी से खिलवाड़ करी। इस समय सभी को अपनी जिंदगी बचाने की पड़ी है। देहरादून जिला प्रशासन ने यह आदेश जारी करने से पहले निम्न बिंदुओं पर विचार कर लिया होता-
-होटल मालिक को कम से कम अपना 75 प्रतिशत किचन स्टाफ बुलाना पड़ेगा। यह स्टाफ किचेन में क्या दूरी maintain रखते हुए काम कर पायेगा? क्या इससे infection को बढ़ावा नही मिलेगा।
-कई होटलों के पास होम डिलीवरी boy की सुविधा नही हैं , वो कैसे manage करेंगे।
-dehradun hotel स्वामी यह भी देख रहे हैं कि कोरोना के खतरे के बीच उनकी लागत निकल भी पाएगी या नहीं। और कितने लोग home delivery का आर्डर करेंगे।
– बाजार से सब्जी व राशन लाने में भी इन्फेक्शन का खतरा बढ़ेगा।
-देहरादून में वेतनभोगी कर्मचारी अधिक संख्या में है। यह वर्ग कम से कम 3 महीने का राशन जमा कर चुका है। वो पहले घर का राशन खत्म करेगा या होटल की dishes की ओर देखेगा। hotel industry से जुड़े लोग भी इस अंकगणित को देख रहे हैं।
कोरोना के इन्फेक्शन को देखते हुए देहरादून के कई होटल मालिक सरकार के इस फैसले पर अमल नही कर रहे है। देहरादून जिला प्रशासन को 14 अप्रैल के lockdown period की समीक्षा के बाद ही होटल से होम delivery के बाबत विचार करना चाहिए था।
-जो लोग स्वंय खाना नहीं बना पा रहे है या मजबूर हैं। उनके लिए भोजन की व्यवस्था कई NGO व सरकारी तंत्र कर ही रहे हैं। ऐसे लोगों को प्रशासन चिन्हित कर भोजन की व्यवस्था करे न कि home delivery को बढ़ावा दे इस crisis में।
देहरादून जिला प्रशासन का होटल खोलने का फैसला समझ से परे है सरकार। सरकार का यह फैसला लोगों की सेहत से खिलवाड़ न कर दे। लिहाजा सरकार को होटल से होम डिलीवरी का फैसला जनहित में वापस ले लेना चाहिए।
(कोरोना खतरे को देखते हुए यह मेरी निजी राय, अब सरकार माने या नहीं, ये उनका विशेष अधिकार ।)

 

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