एक ऐसा मेला जिसमें पकड़ी जाती है हजारों कुंतल मछली 2 साल से नहीं हो पाया था आयोजन

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जौनपुर का ऐतिहासिक मौण मेला इस छेत्र की संस्कृति की एक अनोखी पहचान है। इस मेले में हजारों लोग अगलाड़ नदी में सामूहिक रूप से मछलियां पकड़ते हैं। परंपरा के मुताबिक अलगाड़ नदी में मौणकोट नामक स्थान पर टिमरू की छाल का पाउडर बनाकर डाला जाता है। इस पाउडर से मछलियां बेहोश हो जाती हैं और लोग नदी में उतरकर उन्हें पकड़ते हैं। बताया जाता है कि यह मेला टिहरी नरेश ने शुरू करवाया था। तब स्वयं राजा अपने लाव-लश्कर ओर रानियों के साथ इस मेले में मौजूद रहते थे। इसमें 114 गांव के हजारों ग्रामीण ढोल-नगाड़ों के साथ उत्साह पूर्वक भाग लेते हैं।

बताते चलें कि जौनपुर का ऐतिहासिक मौण मेला दशकों से आयोजित किया जाता रहा है बताया जाता है कि टिहरी नरेश नरेंद्र शाह ने सन 1876 में इसकी शुरुआत की थी बताया जाता है कि टिहरी नरेश ने अगलाड़ नदी में आकर मौण टिमरु का पाउडर डाला था उसके बाद निरंतर यहां मेला आयोजित किया जाता रहा और इसमें राज परिवार के लोग भी शामिल होते थे इसी परंपरा को जीवित रखते हुए आज भी जौनपुर के लोगों द्वारा इस मेले का आयोजन किया जाता है और टिमरू से बने पाउडर से मछलियों को पकड़ा जाता है सबसे अधिक मछलियां पकड़ने वाले को पुरस्कार दिया जाता है टिमरू के पाउडर से जहां नदी साफ हो जाती है मछलियां भी कुछ देर के लिए मूर्छित होकर फिर से जीवित हो उठती है जाल और कुनियाला से मछलियों को पकड़ा जाता है
इस बारे में जानकारी देते हुए ग्रामीण भोपाल सिंह ने बताया है कि यह मेला दशकों से आयोजित किया जाता रहा है उन्होंने कहा कि इससे जहां आपसी भाईचारा बढ़ता है वहीं इस मेले में हिमाचल देहरादून आदि क्षेत्रों से भी लोग यहां मेले में शिरकत करते हैं
उन्होंने बताया कि पिछले 2 वर्षों से कोरोना काल के दौरान इस मेले का आयोजन नहीं किया गया था लेकिन आज बड़ी संख्या में यहां पर ग्रामीण एकत्रित हुए हैं पिछले 2 वर्षों से कोविड-19 इस मेले का आयोजन नहीं हो पा रहा था 2 वर्ष बाद आज पूरे हर्षोल्लास के साथ यह मेला धूमधाम से मनाया गया