दर्द ए लॉकडाउन…आखिर ऐसी क्या थी मजबूरी जो 6 दिन के मासूम को छोड़कर चले गए मां बाप…

0
25

रिपोर्टर : राजीव चावला

काशीपुर: लॉकडाउन में लोगों की कई दर्द भरी दास्तां आपके सामने आई होंगी। लोगों की बहुत ऐसी तकलीफों से भी आप रुबरु हुए होंगे,जिसने आपको झकझोर दिया होगा।लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं एक ऐसे बेबस परिवार की दास्तां जिसे सुनकर आपके रोंगटे खडे हो जाएंगे और आप भी इस बेबस माता पिता की दास्तां सुनकर रो पडेंगे। क्या थी मजबूरी जो चार दिन के बच्चे को अस्पताल में छोडकर माता पिता चले गये, और क्यों बन गये इतने बेरहम…? अस्पताल के बेड पर चार दिन के मासूम को छोडकर आखिर माता पिता कहां चले गये और क्यों इतने बेरहम हो गये कि तीन दिनों तक उन्होंने अपनी बच्चे की कोई सुध भी नहीं ली।

काशीपुर में एक ऎसा ही दिल को झकझोर देने वाला मामला सामने आया जिसे सुनकर आप भी अपने आंसू नहीं रोक पायेंगे। काशीपुर के एक निजी नव्या नाम के अस्पताल में इलाज के लिए चार दिन के बच्चे को इलाज के लिए उसके माता पिता लेकर आये थे। इलाज के बाद जब बच्चा ठीक हुआ तो माता-पिता तीन दिनों तक बच्चे को छोडकर गायब हो गये। अस्पताल प्रबन्धन ने किसी तरह से बच्चे के माता पिता की खोज की, आखिर तीन दिन की मशक्कत के बाद बच्चे के माता पिता को तलाश कर अस्पताल लाया गया। जहां पहले तो उनको खुब खरी खोटी सुनाई गयी, लेकिन जब बेबस माता पिता ने अपना दर्द बयां किया तो सभी की आंखों में आसूं भर आये।

लॉकडाउन की वजह से बेरोजगार हुए मजबूर और बेबस पिता ने बताया कि बच्चे के इलाज में अस्पताल का बिल 31 हजार हो गया, जिसे चुकाने की उसकी हैसियत नहीं थी। कर्ज के लिए कई चौखटें पर हाथ भी फैलाया लेकिन कहीं से कोई मदद नहीं मिली, पैसे ना होने की वजह से माता पिता ने अपने दिल पर पत्थर रख लिया और रोज कर्ज लेने के लिए दर दर भटकते रहे।

लॉकडाउन की ऐसी विवशता की बेबस माता पिता पैसे ना होने की वजह से अस्पताल का बिल नहीं दे पाए। लॉकडाउन की वजह से काम पुरी तरह से बंद हो गया और घर में पहले ही खाने को रोटी तक नसीब नहीं। ऐसे में अस्पताल का 31 हजार का बिल चुकाने में असमर्थ पिता बच्चे को अस्पताल में ही छोडकर चला गया।वहीं अस्पताल प्रबन्धन का कहना है कि उन्होने जब चार दिन तक कोई बच्चे की सुध लेने नहीं आया तो परिवार को तलाश किया। किसी तरह से परिवार को अस्पताल लाये और महज दवाई का खर्च लेकर बच्चे को परिजनों को सोंप दिया।

लॉकडाउन की वजह से ना जाने कितने ही लोगों ने कष्टों का सामना किया है। कितने ही बेरोजगार और भुखमरी की कगार पर पहुंच गये, लेकिन इनके दर्द को समझने वाला कोई नहीं है। आखिर कितना मजबूर हुआ होगा वो पिता जो बच्चे के इलाज के लिए पैसे नहीं चुका पाया तो बच्चे को अस्पताल में छोड कर्ज के लिए दर दर भटकता रहा। चार दिनों तक बच्चे को छोडकर अपने दिल को कितना मजबूत किया होगा, ये तो उस पिता का दिल ही समझ सकता है। इस बेबस और लाचार परिवार की तो किसी तरह से मदद हो गयी, लेकिन आज भी बहुत से लाकडाउन के ऐसे जख्म है जो लोगों के दिल में घाव बन रहे हैं, और जिन्दगी की जंग को रोज लड रहे हैं।

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here