क्या आप जानते हैं तुलसी पूजा के सही नियम…और रविवार को क्यों नहीं तोड़ने चाहिए तुलसी के पत्ते…!

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“आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।। नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।। तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।”

भारतीय संस्कृति में किसी भी कार्य को करने से पहले उस कार्य को कब और कैसे करना चाहिए। लोग उसे करने के लिए मुहूर्त और दिन के हिसाब से करते हैं। मुहूर्त काल में तिथि,वार, नक्षत्र, योग एवं करण आदि को महत्व दिया जाता है। इसलिए हर व्यक्ति उसी अनुसार
कार्य करने लगता है। सात वोरों में रवि, मंगल, को क्रुर एवं शनि को अशुभ माना जाता है।

विष्णु पुराण में तुलसी के महत्व की व्याख्या की गई है।यही वजह है कि लगभग हर भारतीय घर में तुलसी का पौधा जरूर लगाया जाता है। लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि तुलसी की पूजा में कौन से नियमों का पालन जरूरी है और रविवार को तुलसी का पत्ता क्यों नहीं तोड़ना चाहिए।

तो जानते है नियम…

भारतीय परंपरा में किसी वृक्ष या पौधे को अपने उपयोग के लिए लगाना, काटना या उसके पत्ते लेना आदि के लिए समय यानी मुहूर्त तय किया गया है। कई जगहों पर आज
भी इसी परंपरा का पालन किया जाता है।

विष्णु पुराण के अनुसार रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रान्ति, सुर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण तथा सांय काल में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए।

मान्यता के अनुसार तुलसी मां एकादशी व्रत करती हैं और इसलिए उन्हें तोड़कर परेशान नहीं किया जाता।

एकादशी के दिन पत्ते तोड़ने से घर में गरीबी का वास होता है। ठीक उसी प्रकार रविवार को भी तुलसी का पत्ता तोड़ने की मनाही होती है। रविवार विष्णु
का प्रिय वार है। ऐसे में लक्ष्मी के रूप तुलसी को इस दिन तोड़ना उनका अपमान करने जैसा है।

कई जगहों पर क्रुर वार होने के कारण मंगलवार को भी तुलसी नहीं तोड़ते।तुलसी का पत्ता बिना स्नान किए नहीं तोड़ना चाहिए।

शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बिना नहाए ही तुलसी के पत्तों को तोड़ता है तो पूजन में ऐसे पत्ते भगवान द्वारा स्वीकार नहीं किए जाते हैं। तुलसी के पत्तों को 11 दिनों तक बासी नहीं माना जाता है। इसकी पत्तियों पर हर रोज जल छिड़कर पुनः भगवान को अर्पित किया जा सकता है।

शास्त्रों के अनुसार शिव जी, गणेश जी और भैरव जी को तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए। माना जाता है कि विष्णु भक्त होने की वजह से रविवार को तुलसी उनकी भक्ति में लीन रहती हैं। उनकी तपस्या भंग न हो इसलिए रविवार के दिन तुलसी के पौधें में पानी नहीं दिया जाता है।

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