सरकार की सुस्ती सीएमओ देहरादून की जबरदस्त मस्ती…

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देहरादून: प्रदेश की लचर स्वास्थ्य सेवाओं का हाल किसी से छिपा नही है। आज कोरोना जैसी महामारी से जँहा आम जन परेशान है, वंही दून के सीएमओ जिनके कन्धों पर राजधानी की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने की जिम्मेदारी है, वो अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय कुर्सी की हनक में फ्रन्ट लाईन में काम करने वाले चिकित्सको व स्वास्थ्य कर्मचारियों का उत्पीड़न करने में मशगूल है।

जी हाँ आप को बता दे इन दिनों राजधानी में जैसे जैसे कोरोना बढ़ रहा है, वैसे वैसे सीएमओ डॉ बी सी रमोला और स्वास्थ्य कर्मचारियों के बीच तनातनी भी बढ़ती जा रही है। आलम ये है कि मुख्यमंत्री के चिकित्सक डॉ एनएस बिष्ट को अस्पताल में ही स्वस्थ्यग्रह करना पड़ रहा है, वंही सीएमओ द्वारा किये गए उत्पीड़न के वीरोध में महिला चिकित्सको को डीजी हेल्थ में धरना प्रदर्शन करना पड़ रहा है। वंही संविदा पर कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ आर सी रावत ने अपने उत्पीड़न की शिकायत यमुनोत्री से भाजपा विधायक के माध्यम से मुख्यमंत्री से 25 जुलाई को लगाई लेकिन दो दिनों तक कोई सुनवाई न होने से खफा विधायक ने आज प्रेस वार्ता के माध्यम से अपनी ही सरकार में कार्यरत सीएमओ के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान कर दिया, लेकिन पिसी करने से पहले ही मुख्यमंत्री दरबार से विधायक को बुलावा आ गया तो प्रेस वार्ता स्थगित कर दी गयी। और सरकार की एक बार फिर अपने ही विधायक से किरकिरी होने से बच गयी।

विधायक ने सीएम को लिखे पत्र में ये भी जिक्र किया कि इससे पहले भी सीएमओ रमोला की शिकायत की गई है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नही हुई है और डॉ आर सी रावत को देश भावना से बिना अधिकार के पद का दुरुपयोग करते हुए पद से हटाया गया है। वंही सूत्रों की माने तो सीएम ने डॉ आर सी रावत की शिकायत पर जल्द ही प्रभावी कार्रवाई करने का भरोसा दिया है।

अब आप को बताते है सीएमओ देहरादून कौन है और क्यो इतना चर्चित हो रहे है। जी हाँ डॉ बी सी रमोला नेत्र सर्जन है इनको सीएमओ की कुर्सी पर बैठे लगभग 2 माह का समय हुआ है इससे पहले ये कोरोनेशन गाँधी शताब्दी जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे। अगर उससे और पीछे जाए तो डॉ रमोला दून चिकित्सालय में नेत्र सर्जन के तौर पर काफी लम्बे समय तक तैनात रह चुके है, जँहा पर इनके ऊपर लेंस घोटाले व अन्य कई तरह के आरोप भी लगे है। जाँच अभी भी लम्बित है ।

वंही कोरोनेशन अस्पताल के अधीक्षक के पद पर रहते हुए महिला स्टाफ द्वारा छेड़छाड़ के आरोप भी लगाए गए वो भी उच्च न्यायालय में लम्बित है।इसके बाद अब बात करते है सीएमओ की कुर्सी पर बैठने के बाद जो कारनामे किये जा रहे है उसके बारे में अक्टूबर 2018 में जारी शासना देश में उत्तराखंड में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को देखते हुए पीएमएचएस के मानकों के दृष्टिगत सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सको को 65 वर्ष की आयु तक पुनर्नियुक्ति दी जाए। उसके बाद से तमाम चिकित्सक सेवा निवृत्त होने के बाद भी अपनी सेवाएं संविदा के तौर पर दे रहे थे, लेकिन सीएमओ रमोला ने ऐसे तमाम डॉक्टरों की सेवाएं ही समाप्त कर दी जबकि कोविड 19 के दृष्टिगत निदेशालय स्तर से जारी 22 मार्च के एक आदेश में भी साफ लिखा है जो भी संविदा पर कार्यरत चिकित्सक है उनकी 3 दिन के लिए सेवाएं रोक कर पुनः यथास्थान पर सेवा विस्तार किया जाए लेकिन इन आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए इस तानाशाह सीएमओ ने इनकी छुट्टी कर दी।

डॉ आर सी रावत ने अपने पत्र में यंहा तक आरोप लगाया है कि सीएमओ रमोला अपने निजी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सको से सेवाएं देने का दबाव बना रहे थे जिसको न मानने पर अपने पद का दुरुपयोग किया गया है।

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