ऋषिगंगा पर पनबिजली परियोजनाओं को रद्द करने की मांग वाली याचिका उच्च न्यायालय में खारिज

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नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ऋषि गंगा तपोवन और विष्णुगाड पर बन रहे हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पांचों याचिकाकर्ताओ पर न्यायालय का समय व्यर्थ करने के लिए दस हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए जनहित याचिका को खारिज कर दिया है।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश आर.एस.चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खण्डपीठ में हुई। मामले के अनुसार रैणी गाँव निवासी संग्राम सिंह व चार अन्य ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि रैणी गाँव के तपोवन और विष्णु घाट में बन रहे हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है।

एनटीपीसी की ओर से अदालत में अपनी दलील में गुप्ता ने कहा कि तपोवन—विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना उत्ताराखंड के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है । उन्होंने कहा कि एनटीपीसी हमेशा सभी पर्यावरणीय मंजूरियां लेकर काम करती है और वह पहाड़ों के सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध है । इस वर्ष सात फरवरी को चमोली की ऋषिगंगा नदी में आई बाढ़ में 204 लोग लापता हो गए थे जिनमें से अब तक 83 शव और 36 मानव अंग बरामद हो चुके हैं ।