19 दिन बाद होनी थी शादी, लेकिन तभी आ गई बेटे शहादत की खबर…

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देहरादून: 14 फरवरी 2019 का दिन कोई भी भुला नहीं सकता है। बीते साल 14 फरवरी को हुए पुलवामा आतंकी हमले ने पूरे देश की आंखे नम कर दी थी। इस हमले में 44 CRPF जवान शहीद हो गए थे।

16 फरवरी को उत्तराखंड के मेजर चित्रेश बिष्ट…

वहीं इस हमले के बाद 16 फरवरी को उत्तराखंड के मेजर चित्रेश बिष्ट राजौरी के नौसेरा सेक्टर में पाकिस्तान की बार्डर एक्शन टीम (बैट) की ओर से बिछाई गई आईईडी को डिफ्यूज करते समय हुए विस्फोट में शहीद हो गए थे। चित्रेश की शहादत की खबर उस समय आई जबकि उनके घर पर शादी की तैयारियां चल रही थीं। मेजर चित्रेश की सात मार्च को शादी होने वाली थी, शादी के निमंत्रण पत्र भी बंट चुके थे।  मेजर चित्रेश बिष्ट शादी के 19 पहले शहीद हो गए थे। परिवार में खुशियों का माहौल था, हर कोई खुश था कि उनके घर में बहु आने वाली है मगर किस्मत ने ऐसा रुख बदला कि परिवार कि खुशियां एक झटके में मातम में बदल गई।

सरहद पर शहादत के दौरान मेजर चित्रेश…

मेजर चित्रेश मूल रूप से रानीखेत के पीपली गांव के रहने वाले थे। वर्तमान में उनका परिवार देहरादून की नेहरू कॉलोनी में रहता है। उनके पिता सुरेंद्र सिंह बिष्ट उत्तराखंड पुलिस से इंस्पेक्टर पद से रिटायर हैं। सरहद पर शहादत के दौरान मेजर चित्रेश की उम्र 28 साल की थी। भारतीय सैन्य अकादमी से सैन्य प्रशिक्षण पूरा कर वह वर्ष 2010 में पास आउट हुए थे।

लेकिन आखिर ऐसा कब तक…

बेटे की शहादत की बरसी पर पूरा परिवार गमजदा है। देश की हिफाजत करते हुए उनका बेटा शहीद हुआ है। इसके लिए उन्हें गर्व तो है, लेकिन दोबारा ऐसा न हो इसके लिए सख्त कदम उठाने की बात परिजन कह रहे हैं। मेजर चित्रेश के पिता ने नम आंखों और रुंधे गले से कहा कि उनका बेटा देश के हिफाजद के लिए शहीद हुआ है, लेकिन आखिर ऐसा कब तक चलता रहा। शरहद पर तैनात हर जवान सुरक्षित रहे और उनके परिवार हो हर वक्त चिंता न हो इसके लिए सरकार को कदम उठाने ही होंगे। जिस प्रकार से 1971 में पाकिस्तान का इलाज किया गया था। इसके बाद वह कई सालों तक सिर नहीं उठा पाया था। इसी प्रकार से इसका इलाज किया जाना चाहिए।

अपने बेटे नाम पर 11-11 गरीब बच्चों को…

शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट के पिता एसएस बिष्ट ने कहा कि जल्द ही वह अपने बेटे नाम पर 11-11 गरीब बच्चों को 10-10 हजार की छात्रवृत्ति प्रदान करेंगे। इसमें 11 बच्चे अल्मोड़ा और 11 देहरादून के होंगे। उन्होंने कहा कि बच्चों को सेना के लिए तैयार करना ही मेरा सपना है। इसके लिए उनकी मुख्यमंत्री से भी बात हुई है।

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