क्वारन्टीन सेंटरों में प्रवासियों की देख-रेख का जिम्मा सम्भाल रहे ग्राम प्रधानों को अब सूचना तंत्र की कमजोरी का उठाना पड़ रहा खामियाजा…

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रिपोर्ट: मुकेश बछेती

पौड़ी: ग्रामीण क्षेत्र के तमाम क्वारन्टीन सेंटरों में प्रवासियों की रेख देख और सभी व्यवस्थाओ का जिम्मा सम्भाल रहे ग्राम प्रधानों को अब सूचना तंत्र की कमजोरी का खामियाजा उठाना पड़ रहा है। जिससे आलम ये हो चुका है कि ग्राम प्रधान की दिक्कते वे पुराने शासनादेश बढ़ा रहे हैं, जो कि पूर्व में जारी होने को बाद इसके चंद ही दिनों बाद ही निरस्त तक हो चुके हैं और इसके बदले जारी किए गए नए शासनादेश सूचना तंत्र की कमजोरी के चलते ग्राम प्रधानों तक पहुंचे ही नही।

ऐसे में यही पुराने शासनादेश अब तक ग्रामीण क्षेत्रो में ग्राम प्रधानों की सरदर्दी बन रहे थे। शासनादेश पुराना हो चुका है, इसकी जानकारी मुख्यालय पहुँचे ग्राम प्रधानों को तब पड़ी जब वे पुराने शासनादेश लेकर डीएम से मिले हैं और शासनादेश में लिखी शर्तो को पूरा न करने की आपत्ति जताई।

दरअसल पुराने शासनादेश के मुताबित हर ग्राम प्रधानों को पीपीई कीट लेना अनिवार्य किया गया था। जिनकी कीमत प्रति किट 10 हजार थी। ऐसे में इस आपत्ति पर डीएम पौड़ी ने बताया कि नए शासनादेश कड़े मन्थन के बाद जारी हो चुके हैं, जिस पर इक्षानुसार ही ग्राम प्रधान इन किट को ले पाएंगे जो इन्हें लेने में खुद को सक्षम मान रहे हैं।

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