Inside Story: क्यू अधर मे हरक सिंह रावत!

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लोकजन टुडे

उत्तराखंड की सबसे बड़ी इनसाइड स्टोरी आखिर क्यों निकाल दिए गए हरक सिंह रावत…

आखिर किसी भी राजनीतिक पार्टी में क्यों नहीं टिक पाते हरक सिंह रावत…

आखिर क्या चाहते हैं हरक सिंह रावत हम बताएंगे इस इनसाइड स्टोरी में…

जब सब कुछ ठीक चल रहा था तो हरक सिंह रावत ने भाजपा पार्टी में बगावत क्यों की.. यह एक बड़ा सवाल है आखिर हरक सिंह रावत चाहते क्या है? हरक सिंह रावत की मंशा क्या है? आखिर वह किस पद प्रतिष्ठा को चाहते हैं जिसके चलते उन्होंने भाजपा में थी बगावत के सुर बुलंद कर दिए जिसके बाद भाजपा ने उन्हें निष्कासित कर दिया?

अगर इस खबर को समझने की कोशिश करें तो सबसे पहले यह समझना होगा कि हरक सिंह रावत चाहते क्या है? हरक सिंह रावत अपने राजनीतिक जीवन में वह सभी पद पा चुके हैं सिर्फ मुख्यमंत्री को छोड़कर… और यही सबसे बड़ी हरक सिंह रावत के कलह की वजह हैं…
आपको याद दिला दें साल 2016 में हरक सिंह रावत ने हरीश रावत सरकार गिराने के लिए 9 विधायकों के साथ कांग्रेस पार्टी को धोखा दे दिया और भाजपा को ज्वाइन किया था हरक चाहते थे कि भाजपा में वह भाजपा का चेहरा बनकर उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करें लेकिन ऐसा हो नहीं सका… आपको बता दूं कि तीरथ सिंह रावत और हरक सिंह रावत आपस में धुर विरोधी रहे तीरथ सिंह रावत के पुरानी ढंचा बीज घोटाले मामले को लेकर हरक सिंह आए दिन कटाक्ष करते थे वही मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत भी उन्हें नई-नई नसीहत देते थे मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद तीरथ सिंह रावत हरक सिंह रावत ने घेरने का प्रयास किया और कहा बीज घोटाला किसका था इसकी भी तो जांच होनी चाहिए इसी के तुरंत बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी प्रतिक्रिया देते हुए हरक सिंह रावत को सीधे रूप से कहा था हर को क्यों ढेचू ढेचू करता है… त्रिवेंद्र सिंह रावत के हटने के बाद दिल्ली से देहरादून की खूब दौड़ लगी हरक सिंह रावत की लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बनाया क्या मुख्यमंत्री का चेहरा बने तीरथ सिंह रावत… उसके बाद भी हरक सिंह रावत को भवन में चले गए थे तीरथ के हटने के बाद हर कोई ऐसा लगा शायद अब आलाकमान उन्हें मुख्यमंत्री पद सौंप देगा लेकिन सीनियरिटी के आधार पर उत्तराखंड में मुख्यमंत्री का चुनाव नहीं हुआ सबसे जूनियर कहे जाने वाले पुष्कर सिंह धामी का मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में उभरना हरक सिंह रावत के लिए सबसे बड़ा दर्द था अंदर खाने उन्होंने इसका विरोध भी बहुत किया लेकिन कुछ नहीं हो सका आए दिन कांग्रेस के बड़े नेताओं से मिलने का सफर शुरू किया हरक सिंह रावत ने.. दबाव की राजनीति करने की कोशिश की हरक सिंह रावत ने लेकिन इस दबाव की राजनीति को भाजपा और कांग्रेस दोनों ही समझ चुके थे..
हमारे विश्वास सूत्र बताते हैं कि इस कहानी में भाजपा और कांग्रेस की दोनों वरिष्ठ नेता इस बात को भली तरह से जान चुके थे कि अगर हरक सिंह रावत ऐसे ही विरोध करते रहे तो मुख्यमंत्री सीट को लेकर विवाद होना निश्चित है विश्वस्त सूत्र दावा करते हैं कि भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं ने हरक सिंह रावत के अड़ियल रुख और बगावती तेवरों के चलते अंदर खाने हाथ मिला लिया और कौन बनेगा मुख्यमंत्री के खेल से बाहर कर दिया पिछले 72 घंटे से हरक सिंह रावत किस पशोपेश में है कि कांग्रेस उन्हें सदस्यता दे देगी लेकिन ऐसा हो नहीं सका मजबूत सूत्र बताते हैं कि हरक सिंह रावत अब पुष्कर सिंह धामी से लगातार संपर्क में आ चुके हैं तीन बार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को कॉल करके गिला शिकवा दूर करने की बात भी कर चुके हैं अब देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले दिनों में हरक सिंह रावत को कौन सी पार्टी टिकट देती है या नहीं…