मंगलौर में लालाओं के अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग मेहरबान क्यों ?

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संवाददाता- सलमान मलिक
रुड़की| नाम किसी ओर का तो काम किसी ओर का,, जी हां ऐसा सब हो रहा है रुड़की के मंगलौर कस्बे में जंहा पर लालाओं के अस्पतालों के बोर्ड पर नामचीन डिग्री धारी डॉक्टरों के नाम लिखे हुए हैं पर अस्पताल में मौके पर वो डॉक्टर प्रेक्टिस कर रहे हैं जिन्हें स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों में प्रेक्टिस करने की अनुमति नहीं देता है। मंगलौर कस्बे में इस कोरोना काल में भी लालाओं के अस्पताल किसी काले धन्धे से कम नहीं है यँहा पर कई निजी अस्पताल चलाए जा रहे हैं जिनमे कुछ अस्पतालों के तो रजिट्रेशन नहीं है और कुछो के रजिस्ट्रेशन में बड़ा फर्जीवाड़ा हैं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यँहा कुछ अस्पतालों को चलाने के लिए कागजो की फॉर्मलटी में MBBS जैसे बड़े डॉक्टरों के कागजात लगाए हुए हैं पर मौके पर उनकी कुर्सी पर छोटी डिग्री वाले डॉक्टरों से प्रेक्टिस कराई जा रही हैं।
सूत्रों के अनुसार इन अस्पतालों के मालिक भी डॉक्टर लाईन से जुड़े हुए नहीं है वो सिर्फ इन अस्पतालों को एक दुकान की तरह खोलकर चला रहे हैं और भोलेभाले लोगों की जेबे काट रहे हैं इस कोरोना जैसी मुश्किल घड़ी में भी स्वास्थ्य विभाग आखिर क्यों आँखे मूंदकर बैठा हुआ है यह एक बड़ा सवाल खड़ा होता हैं। मंगलौर कस्बे के हर गली मोहल्ले मे झोलाछाप डॉक्टरों की भी बड़ी तादाद में दुकाने खुली हुई है जो मरीजो की जिंदगियों से खिलवाड़ कर रहे हैं। बहरहाल अब देखने वाली बात यह होगी कि स्वास्थ्य विभाग कब इन लालाओं के अस्पतालों की जाँच कर कार्यवाही करता है या इन लालाओं की दुकानो पर भोलेभाले लोगों की जेब पर ऐसे ही डाका डलता रहेगा?

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