
लोकनज टुडे, देहरादूनः शादी समारोह में खाना खाते समय हुए विवाद के बाद घायल अनुसूचित जाति के युवक की मौत के 33 घंटों की मशक्कत के बाद मृतक का अंतिम संस्कार हुआ। वहीं जितेंंद्र दास ने अपनी बहन की शादी का जो सपना देखा वह भी अधूरा रह गया। बहरहाल सरकार की ओर से आश्वासन दिया है कि दोषियों के ख्लिााफ कार्रवाई की जाएगी। बताते चलें कि विवाह समारोह में हुई मारपीट से घायल अनुसूचित जाति के युवक का अंतिम संस्कार लंबी जद्दोजहद के बाद 33 घंटे बाद किया गया। परिवार का रो—रोकर बुरा हाल है। जितेंद्र अपनी बहन की शादी की तैयारियों में जुटा था। उसकी मौत के साथ ही उसका यह सपना अधूरा रह गया। मौत से गुस्साए परिजन दोषियों और पुलिस के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग को लेकर रविवार देर शाम तक देहरादून कोरोनेशन अस्पताल में धरने पर डटे रहे। शव को लेकर सीएम आवास जाने की भनक लगते ही पुलिस ने उन्हें रोक दिया और मामला नैनबाग पुलिस चौकी क्षेत्र का बताकर शव को लेकर रवाना हो गए। परिजनों का आरोप है कि पुलिस चौकी जाने के बजाए रात को ही शव को लेकर गांव पहुंच गई। परिजनों ने इस पर कड़ा विरोध जताया। सोमवार सुबह नैनबाग पहुंचे धनोल्टी एसडीएम रजा अब्बास ने परिजनों के साथ वार्ता कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। उसके बाद दोपहर एक बजे यमुना नदी घाट पर युवक का दाह संस्कार किया गया। बता दें कि जौनपुर ब्लॉक के श्रीकोट गांव में दस दिन पहले एक विवाह समारोह में दबंगों की पिटाई से घायल जितेंद्र दास (23) निवासी बसाण गांव ने उपचार के दौरान देहरादून अस्पताल में दम तोड़ दिया था। घटना से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में धरना देते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिस कर्मियों की बर्खास्तगी की मांग को लेकर कोरोनेशन अस्पताल में धरना दिया। पुलिस ने घटनास्थल नैनबाग क्षेत्र बताकर शव को लेकर नैनबाग निकल गए। परिजनों ने आरोप लगाया कि पुलिस शव को पुलिस चौकी ले जाने के बजाए गांव ले जाने लगी।

इसका विरोध करते हुए परिजन नैनबाग में एंबुलेंस से उतर गए। बावजूद इसके पुलिस शव को लेकर गांव पहुंच गई, लेकिन गांव में शव की सुपुर्दगी लेना वाला कोई नहीं मिला। इस बीच सोमवार को नैनबाग पहुंचे धनोल्टी एसडीएम को भी ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। परिजनों ने कहा कि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई होने के बाद ही दाह संस्कार किया जाएगा। काफी देर तक चली वार्ता के बाद परिजन शव का दाह संस्कार करने को राजी हो गए।
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