पुलवामा हमले के शहीदों के लिए सेना कर रही है यह बड़ा काम…

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रिपोर्ट: कुलदीप रावत

देहरादून: पुलवामा हमले को एक बरस हो गया है। जिसमें हमारे कई सीआरपीएफ के जवान शहीद हुए। उनमें से 2 जवान उत्तराखंड के भी थे। जिसमें एक उधमसिंह नगर और दूसरे शहीद मोहन लाल रतूड़ी जो मूल रूप से उत्तरकाशी के रहने वाले हैं, लेकिन कई वर्षों से बच्चों की पढ़ाई की खातिर देहरादून में रह रहे थे। पुलवामा हमले को हुए एक साल पर हमने जाना शहीद मोहनलाल रतूड़ी के परिवार का हाल और ये जानने की कोशिश की कि उनका परिवार खुद को कितना गर्वानवित महसूस करता है।

शहीद मोहनलाल रतूड़ी की सबसे बड़ी बेटी की शादी हो चुकी है , उनका बेटा शंकर उत्तरकाशी में सरकारी नौकरी करता है। छोटी बेटी वैष्णवी अभी पढ़ाई कर रही है और सबसे छोटी बेटी मेडिकल की पढाई कर रही है और सबसे छोटा बेटा अभी 10वीं में पढ़ाई कर रहा है।

मोहनलाल रतूड़ी की पत्नी सरीता देवी देहरादून में अपने बच्चों के साथ किराये के मकान में रहती हैं। सरीता देवी कहती हैं की उन्हें गर्व का की उनके पति देश की सेवा के लिए शहीद हुए।साथ ही उन्होंने अपने पति को याद करते हुए कहा की उनका सपना था की वो अपना घर खरीदें लेकिन ये सपना आज भी अधूरा है।

मोहन लाल रतूड़ी की पत्नी सरीता देवी कहती हैं कि आतंकवादियों को उनके करे की सज़ा मिलनी चाहिए। जो जवान आज सरहदों पर तैनात हैं। उन्हें अपने देश के खातिर आतंकवाद से ज़रूर लड़ना चाहिए। मोहनलाल रतूड़ी के परिवार के साथ कई सालों से रह रहे उनके पड़ोसी बताते हैं कि वो बेहद मिलनसार और धार्मिक प्रवृति के इंसान थे। जब भी वे घर आते थे तो सभी लोगों से मिलना-जुलना उनका बहुत अच्छा था।

पुलवामा हमले में शहीद हुए सभी जवानों के घरों से मिट्टी ली जा रही है। जिससे पुलवामा में शहीद स्मारक बनाया जायेगा। शहीद मोहनलाल रतूड़ी के मूल गांव उत्तरकाशी से भी सीआरपीएफ ने मिट्टी इक्कठी करवाई है जिसे पुलवामा पहुंचाया जायेगा। पुलवामा में 14 फरवरी के बाद से शहीद जवानों के नाम स्मारक बनाया जायेगा।

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