पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एक कुशल नर्तक हैं परंतु उन्हें नाचने के लिए अच्छी धुन एवं मंदिर नहीं मिल पा रहा: विधायक राजेश शुक्ला

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किच्छा: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत एक कुशल नर्तक हैं परंतु उन्हें नाचने के लिए अच्छी धुन एवं मंदिर नहीं मिल पा रहा है तो उन्हें अयोध्या में निर्मित हो रहे प्रभु श्री राम जी के मंदिर में आकर भगवा चोला धारण कर प्रभु श्री राम जी की भक्ति वाली धुन पर नाचना चाहिए और भाजपा में शामिल होकर अपना भविष्य सवारना चाहिए।

उक्त बात किच्छा क्षेत्र से तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत को हराकर दूसरी बार विधायक चुने गए राजेश शुक्ला ने हरीश रावत के कल के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि हरीश रावत द्वारा दिया गया बयान हताशा निराशा व दिशाहीनता का परिचायक है तथा वे उसी दौर से गुजर रहे हैं जिस दौर से कांग्रेस पूरे देश में गुजर रही है।

उन्होंने कहा कि हरीश रावत द्वारा लगातार अपनी हार का उल्लेख करना घुंघरू के कुछ दाने टूट जाने पर भी अपने को कुशल नर्तक बताना और किस मंदिर में जाकर कौन सी धुन पर नाचोगे जैसा सवाल ट्वीट करना उनके मानसिक स्थिति व घोर निराशा व किंकर्तव्यविमूढ़ता को दर्शाता है।

विधायक राजेश शुक्ला ने कहा कि गंग नहर को कैनाल घोषित करने की उनकी अपनी गलती को स्वीकार करने के बयान पर कहा कि जब इतना स्वीकार किया है तो यह भी बताएं कि उक्त नहर के दोनों तरफ बिल्डरों को बचाने के लिए क्या डील हुई थी यदि वास्तव में प्रायश्चित करना है तो हरिद्वार से ज्यादा उपयुक्त स्थान सन्यास के लिए दूसरा कोई नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक रूप से मंदिर की तलाश है तो भाजपा में शामिल होकर हिंदुत्व को सशक्त बनाने एवं भगवान प्रभु राम मंदिर निर्माण में सक्रिय होकर भगवा चोला पहनकर  राम धुन पर नाचे क्योंकि कांग्रेस की वर्तमान स्थिति में उन्हें अपना भविष्य तलाशने के लिए राम जी के चरणों में ही सुरक्षित स्थान मिलेगा ।

उन्होंने जिस तरह लगातार अपनी हार का उल्लेख किया है तथा जिस तरह अल्पसंख्यक बाहुल्य सीट चुनने पर भी उनकी मुख्यमंत्री रहते दो-दो स्थानों से हार हुई है इससे लगता है कि तुष्टीकरण की राजनीति से उनका मोहभंग हो गया है और वह किसी नई धुन पर नए मंदिर में नाचने का रास्ता भी खोज रहे हैं जो उन्हें भाजपा में ही मिल सकती है।

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